प्रेम के देवता को एक सफ़ेद और चमकदार शरीर से बाँध रही थी। पच्चीस साल की मोटी युमा। पहली बार रस्सी से डरी उस औरत के शरीर को रस्सी का एहसास होने लगा मानो वो बंधी हुई हो। रस्सी युमा की त्वचा के जितना पास होती, उसकी गंध उतनी ही तेज़ होती जाती। एक ऐसे शरीर के लिए जो रस्सी के बिना रह ही नहीं सकता था...
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